नन्हे-मुन्नों के साथ बाहर खाना खाने का ख्याल आते ही, कई मम्मी-पापा के माथे पर चिंता की लकीरें आ जाती हैं, है ना? मुझे याद है, जब मेरे बच्चे छोटे थे, तो यह मेरे लिए भी किसी बड़े मिशन से कम नहीं था!
लेकिन दोस्तों, समय बदल गया है और आजकल स्मार्ट पेरेंट्स के लिए ऐसे-ऐसे कमाल के तरीके और गैजेट्स आ गए हैं, जिनसे यह अनुभव अब डरने वाला नहीं बल्कि यादगार बन गया है.
मैंने खुद कई बार इन टिप्स को आजमाया है और मैं पूरे यकीन से कह सकती हूँ कि इनसे आपकी आधी टेंशन तो ऐसे ही दूर हो जाएगी. कौन सा रेस्टोरेंट चुनें, बच्चों को खाने के दौरान कैसे खुश रखें, या फिर अचानक लगने वाली भूख का क्या इंतजाम हो – मैंने हर पहलू पर अपनी आजमाई हुई ट्रिक्स बटोरी हैं.
यकीन मानिए, इन आसान लेकिन असरदार तरीकों से आप और आपका लाडला/लाडली बाहर के खाने का पूरा मजा ले पाएंगे. तो देर किस बात की, आइए, आज हम इसी खास विषय पर गहराई से बात करते हैं और जानते हैं वे सभी बेहतरीन ट्रिक्स, जो आपके बाहर खाने के अनुभव को बिल्कुल बदल देंगी!
सही रेस्तरां का चुनाव: मेरी पहली सलाह

जगह का माहौल और बच्चों के अनुकूल सुविधाएं
दोस्तों, जब भी हम बच्चों के साथ बाहर खाना खाने का प्लान बनाते हैं, तो सबसे पहली बात जो मेरे दिमाग में आती है, वो है रेस्तरां का चुनाव. आप सोचिए ना, अगर जगह बच्चों के हिसाब से नहीं होगी, तो आपका सारा प्लान धुल जाएगा.
मेरा अपना अनुभव कहता है कि ऐसी जगह चुनें जहाँ बच्चों के खेलने या व्यस्त रहने के लिए थोड़ा बहुत इंतज़ाम हो. जैसे, कुछ रेस्तरां में छोटे बच्चों के लिए हाई चेयर (High Chair) होते हैं, कुछ में थोड़ी जगह होती है जहाँ बच्चे बिना किसी को डिस्टर्ब किए थोड़ा टहल सकते हैं, या फिर बच्चों के लिए कलरिंग बुक या छोटी-मोटी खिलौने भी दे देते हैं.
मैं खुद ऐसे रेस्तरां पसंद करती हूँ जहाँ का माहौल थोड़ा शोरगुल वाला हो, ताकि मेरे बच्चे की थोड़ी बहुत आवाज किसी को परेशान न करे. शांत, फाइन डाइनिंग (Fine Dining) रेस्तरां से तो बिल्कुल दूर ही रहें, मेरा यकीन मानिए!
उनके मेन्यू में बच्चों के लिए कुछ हो न हो, लेकिन उनके व्यवहार में जरूर होना चाहिए. पहले से कॉल करके पूछना भी एक अच्छा विचार है.
मेनू और बच्चों की पसंद का ध्यान
मेनू भी एक बहुत बड़ा फैक्टर है. मैं हमेशा ऐसे रेस्तरां चुनती हूँ जहाँ बच्चों के लिए ‘किड्स मेनू’ (Kids Menu) या कम से कम ऐसे विकल्प हों जो बच्चे आसानी से खा सकें.
जैसे, पास्ता, फ्रेंच फ्राइज़, पनीर टिक्का या सैंडविच जैसी चीजें जो आमतौर पर बच्चों को पसंद आती हैं. मैंने कई बार ऐसा किया है कि बच्चों को पहले ही बता दिया है कि हम कहाँ जा रहे हैं और वहाँ क्या-क्या मिल सकता है.
इससे वे मानसिक रूप से तैयार हो जाते हैं और अपनी पसंद की डिश का इंतज़ार करते हैं. अगर बच्चे बहुत छोटे हैं, तो मैं अपने साथ उनका पसंदीदा स्नैक या घर का बना खाना लेकर जाती हूँ, ताकि उन्हें भूख लगने पर तुरंत कुछ दिया जा सके.
यह छोटी सी तैयारी वाकई बहुत काम आती है!
भूख लगने पर क्या करें: मेरी इमरजेंसी किट
अचानक भूख लगने का समाधान
यह तो हर माता-पिता ने अनुभव किया होगा – आप रेस्तरां पहुंचे ही हैं और आपके लाडले को अचानक भूख लग जाती है! और खाना आने में अभी वक्त है. ऐसे में मेरा इमरजेंसी किट बहुत काम आता है.
मैं हमेशा अपने बैग में कुछ ऐसे स्नैक्स रखती हूँ जो जल्दी खराब न हों और बच्चे को थोड़ी देर के लिए व्यस्त रख सकें. जैसे, कुछ बिस्कुट, सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स), फ्रूट प्यूरी पाउच या फिर कुछ हेल्दी क्रैकर.
मेरा अनुभव बताता है कि यह “भूल भुलैया” से पहले का “सुरक्षित रास्ता” है. एक बार तो मेरे बच्चे को इतनी जोर की भूख लगी थी कि उसने रेस्तरां के वेटर को ही अपना खिलौना दिखा कर बिस्कुट मांग लिए थे!
खैर, ऐसी स्थिति से बचने के लिए, एक छोटी सी तैयारी आपको बड़ी मुसीबत से बचा सकती है. बच्चे भूखे होंगे तो चिड़चिड़े हो जाएंगे और फिर बाहर खाना खाने का मज़ा किरकिरा हो जाएगा.
मनोरंजन के लिए छोटे-मोटे गैजेट्स
खाने के साथ-साथ बच्चों को व्यस्त रखना भी बहुत ज़रूरी है. मैं अपने साथ हमेशा कुछ छोटी-मोटी चीज़ें रखती हूँ जो उन्हें थोड़ी देर के लिए व्यस्त रख सकें. जैसे, उनकी पसंदीदा छोटी सी खिलौना गाड़ी, एक छोटी सी ड्रॉइंग बुक और कुछ क्रेयॉन्स, या फिर एक छोटी स्टोरी बुक.
आजकल तो टैबलेट और स्मार्टफोन पर कुछ एजुकेशनल गेम्स (Educational Games) या वीडियो भी बहुत काम आते हैं, लेकिन मैं इसे आखिरी विकल्प मानती हूँ. मेरा मानना है कि स्क्रीन टाइम को कम से कम रखना चाहिए.
लेकिन हाँ, अगर बिल्कुल ही स्थिति हाथ से निकल रही हो, तो एक छोटा सा वीडियो चला देना कोई बुराई नहीं है. मेरे लिए तो ये चीजें कभी-कभी किसी जादू से कम नहीं होतीं.
नन्हे मेहमानों को व्यस्त रखने के मजेदार तरीके
खेल-खेल में बातों का सिलसिला
दोस्तों, जब हम रेस्तरां में होते हैं, तो खाना आने में थोड़ा समय लगता है, है ना? इस समय को बच्चों के साथ बिताने का यह सबसे अच्छा तरीका है. मैं अपने बच्चों के साथ कई बार ‘आई स्पाई’ (I Spy) या ‘कौन क्या देख रहा है’ जैसे खेल खेलती हूँ.
हम आस-पास की चीजों के बारे में बात करते हैं, जैसे “उस टेबल पर क्या है?”, “वो आदमी कौन सी किताब पढ़ रहा है?”. इससे बच्चे का ध्यान खाने के इंतज़ार से हटकर आसपास की चीजों पर चला जाता है.
मेरा यकीन मानिए, यह तरीका बच्चों को शांत और व्यस्त रखने में बहुत कारगर है. यह सिर्फ समय बिताने का एक तरीका नहीं, बल्कि बच्चों के ऑब्जर्वेशन स्किल्स (Observation Skills) को भी बढ़ाता है.
मैंने खुद महसूस किया है कि जब मैं अपने बच्चों से ऐसे सवाल पूछती हूँ, तो वे कितने उत्सुक होकर जवाब देते हैं.
अपनी कहानी, अपनी कल्पना
बच्चों को कहानियां सुनना बहुत पसंद होता है. मैं अक्सर खाना आने से पहले उन्हें कोई छोटी सी कहानी सुनाती हूँ या फिर उनसे ही कहती हूँ कि वे अपनी कोई कहानी बनाएं.
कभी-कभी हम सिर्फ प्लेट में पड़ी चीजों से भी कोई कहानी गढ़ लेते हैं. जैसे, यह टमाटर है, ये इसकी मम्मी है, ये इसका बच्चा है… और ऐसे ही बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है.
यह उनके कल्पनाशील दिमाग को उड़ान भरने का मौका देता है और वे खुश रहते हैं. मुझे याद है, एक बार मेरे बेटे ने वेटर को ही अपनी बनाई हुई कहानी सुनाना शुरू कर दिया था, और वेटर भी मुस्कुराकर चला गया.
ये छोटे-छोटे पल ही बाहर खाने के अनुभव को खास बनाते हैं.
स्मार्ट प्लानिंग: खाने के समय का प्रबंधन
सही समय पर रेस्तरां पहुँचना
समय का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है. मेरा सुझाव है कि आप बच्चों को उनके सोने के समय या बहुत अधिक भूख लगने से ठीक पहले रेस्तरां न ले जाएं. मैंने अक्सर देखा है कि जब बच्चे बहुत थके हुए या भूखे होते हैं, तो वे चिड़चिड़े हो जाते हैं और फिर उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है.
दोपहर के खाने के लिए, मैं आमतौर पर 12:30 बजे से 1:00 बजे के बीच का समय पसंद करती हूँ, जब रेस्तरां में बहुत भीड़ नहीं होती और बच्चे बहुत भूखे भी नहीं होते.
शाम के खाने के लिए भी यही नियम लागू होता है. मेरा अनुभव है कि जब रेस्तरां में भीड़ कम होती है, तो सर्विस भी जल्दी मिलती है, जिससे बच्चों को ज्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ता.
खाने का ऑर्डर और प्राथमिकता
जैसे ही आप रेस्तरां पहुंचते हैं, मेरा पहला काम होता है बच्चों के लिए खाने का ऑर्डर देना. वेटर के आते ही, मैं पहले बच्चों के लिए उनकी पसंदीदा डिश या कोई ऐसा स्नैक ऑर्डर करती हूँ जो जल्दी बन जाए.
इससे बच्चों को इंतज़ार नहीं करना पड़ता और वे शांत रहते हैं. हम बड़े लोग तो थोड़ा इंतज़ार कर भी सकते हैं, लेकिन बच्चों के लिए भूख बर्दाश्त करना मुश्किल होता है.
एक बार मैंने ऐसा नहीं किया था और मेरा बेटा इतना रोने लगा कि मुझे उसे लेकर बाहर जाना पड़ा. तभी से मैंने यह नियम बना लिया है कि बच्चों का खाना सबसे पहले.
| बच्चों के साथ बाहर खाने की तैयारी | सुझाव |
|---|---|
| रेस्तरां का चुनाव | बच्चों के अनुकूल माहौल, हाई चेयर, किड्स मेनू वाले रेस्तरां चुनें. |
| इमरजेंसी स्नैक्स | बिस्कुट, सूखे मेवे, फ्रूट प्यूरी पाउच साथ रखें. |
| मनोरंजन | छोटी खिलौना गाड़ी, ड्रॉइंग बुक, क्रेयॉन्स या स्टोरी बुक साथ रखें. |
| समय का चुनाव | कम भीड़ वाले समय पर जाएं, बच्चों के सोने के समय से बचें. |
| खाने का ऑर्डर | बच्चों के लिए खाने का ऑर्डर सबसे पहले दें. |
टेबल मैनर्स सिखाने का पहला कदम
धीरे-धीरे शिष्टाचार की सीख
बाहर खाना खाना सिर्फ पेट भरने का अनुभव नहीं है, बल्कि यह बच्चों को सामाजिक शिष्टाचार सिखाने का भी एक बेहतरीन मौका है. मैं अपने बच्चों को हमेशा सिखाती हूँ कि कैसे बैठना है, चम्मच-कांटा कैसे इस्तेमाल करना है और दूसरों से कैसे बात करनी है.
लेकिन हाँ, ये सब एक साथ नहीं हो सकता. मेरा अनुभव कहता है कि छोटे-छोटे कदमों से ही बड़ी सफलता मिलती है. मैं उनसे कहती हूँ कि “धन्यवाद” और “कृपया” कहना सीखें.
अगर उन्होंने कुछ गिरा दिया है, तो उसे उठाने में मदद करें या कम से कम बताएं. एक बार मैंने अपने बेटे को सिर्फ यह सिखाया कि खाना खाते समय शोर न मचाए, और अगले बार जब हम बाहर गए, तो उसने खुद-ब-खुद बहुत शांति से खाना खाया.
यह देखकर मुझे बहुत खुशी हुई.
उदाहरण बनकर सिखाना

बच्चे देखकर सीखते हैं. अगर हम खुद टेबल पर अच्छे मैनर्स दिखाएंगे, तो बच्चे भी वही सीखेंगे. मैं अपने बच्चों के सामने फोन पर बात करने या जोर से हंसने से बचती हूँ.
मैं उन्हें दिखाती हूँ कि खाना कैसे धीरे-धीरे और अच्छे से खाना चाहिए. जब वे कोई अच्छी आदत अपनाते हैं, तो मैं उनकी तारीफ करती हूँ. यह तारीफ उन्हें और भी अच्छा करने के लिए प्रेरित करती है.
यह मेरा आजमाया हुआ तरीका है कि बच्चों को डांटने या टोकने के बजाय, उन्हें सकारात्मक रूप से प्रोत्साहित करें. वे छोटे हैं, गलतियां करेंगे ही, लेकिन हमारा काम है उन्हें प्यार से समझाना और सही राह दिखाना.
जब सब कुछ उल्टा पड़े: शांत रहने के मंत्र
expect the unexpected
सबसे ज़रूरी बात, यह स्वीकार करें कि सब कुछ आपकी प्लानिंग के हिसाब से नहीं चलेगा. बच्चे हैं, कभी भी कुछ भी हो सकता है! वे रो सकते हैं, खाना गिरा सकते हैं, या फिर अचानक भागने की कोशिश कर सकते हैं.
मेरा मंत्र है, ‘एक्सपेक्ट द अनएक्सपेक्टेड’ (Expect the unexpected). मैंने खुद कई बार ऐसी स्थितियों का सामना किया है जहाँ मेरा बच्चा पूरे रेस्तरां में रोने लगा या उसने जूस का गिलास गिरा दिया.
ऐसे में सबसे पहले खुद को शांत रखना ज़रूरी है. एक गहरी सांस लें और सोचें कि यह सिर्फ एक पल है, जो गुजर जाएगा. अगर आप शांत रहेंगे, तो आप बेहतर तरीके से स्थिति को संभाल पाएंगे.
दूसरों की निगाहों की परवाह न करें, क्योंकि लगभग हर माता-पिता ने कभी न कभी ऐसी स्थिति का सामना किया होगा.
परिस्थिति से निपटना और आगे बढ़ना
अगर बच्चा बहुत ज्यादा परेशान कर रहा है, तो कभी-कभी सबसे अच्छा उपाय होता है कि उसे कुछ देर के लिए बाहर ले जाएं. मैं अक्सर अपने बच्चे को थोड़ी देर के लिए रेस्तरां से बाहर ले जाती हूँ, ताज़ी हवा में थोड़ा टहलाती हूँ, और उससे बात करती हूँ.
इससे उसका मूड बदल जाता है और वह शांत हो जाता है. जब हम वापस आते हैं, तो आमतौर पर वह बेहतर मूड में होता है. अगर किसी चीज से गंदगी हुई है, तो माफी मांगें और उसे साफ करने में मदद करें.
यह सब सामान्य है, और इसमें शर्मिंदा होने की कोई बात नहीं. मेरा मानना है कि ये छोटी-मोटी घटनाएं ही हमें एक बेहतर माता-पिता बनाती हैं और हमें सिखाती हैं कि कैसे हर स्थिति में धैर्य रखना चाहिए.
बच्चों के लिए भोजन विकल्प: स्वादिष्ट और सेहतमंद
मेनू से स्मार्ट चुनाव
जब बात बच्चों के खाने की आती है, तो स्वादिष्ट के साथ-साथ सेहतमंद होना भी उतना ही ज़रूरी है. कई बार रेस्तरां के मेन्यू में बच्चों के लिए बहुत सारे विकल्प नहीं होते, या जो होते हैं वो हेल्दी नहीं होते.
मेरा सुझाव है कि आप वेटर से बात करें और बच्चों के लिए कुछ अलग से बनाने का अनुरोध करें, जैसे कम मसाले वाला पास्ता, उबली हुई सब्ज़ियां या ग्रिल्ड पनीर. मैंने कई बार ऐसा किया है और ज़्यादातर रेस्तरां खुशी-खुशी ऐसा करते हैं.
उदाहरण के लिए, एक बार मैंने अपने बच्चे के लिए सिर्फ उबली हुई दाल और चावल का अनुरोध किया था, और उन्होंने खुशी-खुशी बनाकर दे दिया. यह छोटे बदलाव बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं.
घर से लाई कुछ पौष्टिक चीजें
अगर आपको लगता है कि रेस्तरां में आपके बच्चे की पसंद या सेहत के हिसाब से कुछ नहीं मिलेगा, तो बेझिझक घर से कुछ पौष्टिक चीज़ें साथ लेकर जाएं. जैसे, दही, फल, या घर का बना दलिया.
खासकर छोटे बच्चों के लिए यह बहुत ज़रूरी है. मैंने खुद कई बार अपने बच्चे के लिए घर से केले या सेब की प्यूरी (Puree) लेकर गई हूँ. इसमें कोई शर्म की बात नहीं है, आखिर बच्चों की सेहत सबसे पहले है.
आप एक छोटे कंटेनर में या एक छोटे टिफिन में उनके लिए कुछ ले जा सकते हैं. यह सुनिश्चित करता है कि उन्हें पौष्टिक भोजन मिले और वे भूखे भी न रहें.
बाहर खाने को एक खुशनुमा अनुभव कैसे बनाएं
सकारात्मक दृष्टिकोण और लचीलापन
सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात, एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखें. बाहर खाना खाने को एक मजेदार एडवेंचर (Adventure) के रूप में देखें, न कि किसी चुनौती के रूप में.
मेरा अनुभव कहता है कि जब मैं खुद खुश और उत्साहित रहती हूँ, तो मेरे बच्चे भी वैसा ही महसूस करते हैं. लचीले रहें. अगर चीजें प्लानिंग के हिसाब से नहीं चल रही हैं, तो घबराएं नहीं.
थोड़ा एडजस्ट (Adjust) करें और स्थिति का आनंद लें. कभी-कभी, सबसे अच्छी यादें तब बनती हैं जब सब कुछ थोड़ा गड़बड़ होता है. बच्चों के साथ बाहर खाना खाना एक कला है, और अभ्यास से ही इसमें परफेक्शन आता है.
छोटी-छोटी जीत का जश्न मनाएं
हर बार जब आप सफलतापूर्वक बच्चों के साथ बाहर खाना खाकर वापस आते हैं, तो यह एक छोटी सी जीत होती है. इस जीत का जश्न मनाएं! अपने बच्चों को बताएं कि उन्होंने कितना अच्छा व्यवहार किया.
उनकी तारीफ करें और उन्हें बताएं कि आपको उन पर गर्व है. मेरा मानना है कि यह उन्हें अगली बार भी अच्छा व्यवहार करने के लिए प्रेरित करेगा. ये छोटे-छोटे प्रोत्साहन ही उन्हें और बेहतर बनने में मदद करते हैं.
आखिरकार, बाहर खाना खाना सिर्फ भूख मिटाने के लिए नहीं होता, बल्कि परिवार के साथ क्वालिटी टाइम (Quality Time) बिताने और खूबसूरत यादें बनाने के लिए होता है.
तो, अगली बार जब आप अपने नन्हे-मुन्नों के साथ बाहर खाने का प्लान बनाएं, तो इन टिप्स को आज़माएं और देखिए आपका अनुभव कितना यादगार बन जाता है!
글을마치며
तो दोस्तों, बच्चों के साथ बाहर खाना खाना कोई चुनौती नहीं, बल्कि एक खूबसूरत मौका है परिवार के साथ यादगार पल बनाने का। बस थोड़ी सी तैयारी, ढेर सारा धैर्य और एक सकारात्मक सोच के साथ, आप इस अनुभव को वाकई जादुई बना सकते हैं। मेरी सलाह है कि इन टिप्स को अपनी अगली आउटिंग में ज़रूर आज़माएं और फिर देखें कि कैसे आपका परिवार एक साथ हँसते-खेलते और स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेते हुए वापस आता है। याद रखें, ये छोटे-छोटे पल ही जीवन को खास बनाते हैं!
알아두면 쓸모 있는 정보
1. रेस्तरां का चुनाव करते समय बच्चों की ज़रूरतों, जैसे हाई चेयर और किड्स मेन्यू, का खास ध्यान रखें।
2. अचानक भूख लगने या बोरियत से बचाने के लिए अपने साथ इमरजेंसी स्नैक्स और मनोरंजन के छोटे सामान ज़रूर रखें।
3. खाने के समय बच्चों के साथ ‘आई स्पाई’ या कहानी सुनाने जैसे खेल खेलें, ताकि वे व्यस्त और खुश रहें।
4. रेस्तरां में भीड़ कम होने वाले समय पर जाएं और बच्चों के खाने का ऑर्डर सबसे पहले दें, ताकि उन्हें ज़्यादा इंतज़ार न करना पड़े।
5. बच्चों को टेबल मैनर्स सिखाने के लिए खुद उदाहरण बनें और उनकी अच्छी आदतों की तारीफ करके उन्हें प्रोत्साहित करें।
महत्वपूर्ण बातें
बच्चों के साथ बाहर खाना खाते समय सबसे ज़रूरी है लचीलापन और सकारात्मकता। अप्रत्याशित परिस्थितियों के लिए तैयार रहें और उन्हें प्यार व धैर्य से संभालें। यह सिर्फ भोजन का अनुभव नहीं, बल्कि बच्चों को सामाजिक माहौल में ढलना सिखाने और परिवार के रूप में मजबूत होने का भी एक अवसर है। हर छोटी जीत का जश्न मनाएं और यादें बनाएं!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖
प्र: नन्हे-मुन्नों के साथ बाहर खाना खाने के लिए रेस्टोरेंट चुनते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए, ताकि सबका अनुभव यादगार बन सके?
उ: अरे वाह! यह तो सबसे पहला और सबसे ज़रूरी सवाल है. दोस्तों, मैंने अपने अनुभव से सीखा है कि सही रेस्टोरेंट चुनना ही आधी लड़ाई जीतने जैसा है.
सबसे पहले, कोशिश करें कि ऐसा रेस्टोरेंट चुनें जहाँ बच्चों के लिए थोड़ी जगह हो या खेलने का छोटा सा कोना हो. ऐसी जगहें बच्चों को बांधे रखती हैं और आपको थोड़ी शांति मिलती है.
मैंने खुद कई बार ऐसे रेस्टोरेंट देखे हैं जहाँ बच्चों के लिए हाई चेयर होती हैं और स्टाफ भी बच्चों के साथ फ्रेंडली होता है, यह बहुत बड़ी बात है. ऐसे रेस्टोरेंट को प्राथमिकता दें जहाँ सर्विस थोड़ी तेज़ हो, क्योंकि बच्चों का सब्र बहुत कम होता है!
मेन्यू में बच्चों के लिए कुछ ख़ास ऑप्शन्स हों, तो और भी बढ़िया. अगर आप पहले ही ऑनलाइन रिव्यूज़ देखकर बच्चों के लिए उपयुक्त जगहों की जानकारी ले लें, तो यह और भी शानदार रहेगा.
यकीन मानिए, थोड़ी सी रिसर्च आपके पूरे अनुभव को बदल सकती है!
प्र: खाने के दौरान बच्चों को शांत और व्यस्त कैसे रखें, ताकि वे शैतानी न करें और सब आराम से खा सकें?
उ: यह भी एक ऐसी चुनौती है जिसका सामना हर पेरेंट को करना पड़ता है, और मुझे भी खूब याद है जब मेरे बच्चे छोटे थे तो उन्हें शांत रखना किसी कला से कम नहीं था.
मेरे दोस्तों, सबसे पहले तो एक छोटा सा बैग तैयार रखें जिसमें बच्चों के लिए कुछ पसंदीदा चीज़ें हों. जैसे, उनकी कोई छोटी सी खिलौना कार, एक ड्राइंग बुक और क्रयॉन्स, या फिर कोई कहानी की किताब.
मैंने तो एक बार अपने बेटे के लिए एक छोटी सी लेगो किट भी रखी थी, जिसने उसे काफी देर व्यस्त रखा. मोबाइल फोन का इस्तेमाल करें, लेकिन सीमित समय के लिए और वो भी शैक्षिक गेम्स या गाने के लिए, जिससे उनकी स्क्रीन टाइम की आदत भी न पड़े.
सबसे अहम बात, बच्चों के साथ बातचीत करते रहें, उन्हें बताएं कि आप क्या खा रहे हैं, उनसे उनके दिन के बारे में पूछें. मैंने देखा है कि जब बच्चे खुद को शामिल महसूस करते हैं, तो वे ज्यादा शांत रहते हैं.
कभी-कभी मैं उनके साथ ‘आई स्पाई’ जैसा कोई छोटा सा गेम खेल लेती थी, और यह कमाल का काम करता था!
प्र: अगर बच्चे को अचानक भूख लगे या उसे रेस्टोरेंट का खाना पसंद न आए, तो ऐसी आपात स्थिति के लिए क्या तैयारी करनी चाहिए?
उ: हाहा! यह सवाल तो हर उस पेरेंट के दिल की आवाज़ है जिसने कभी भी बच्चे के साथ बाहर खाना खाया हो. मुझे अच्छी तरह याद है, एक बार हम एक बहुत अच्छे रेस्टोरेंट में थे और मेरी बेटी ने वहां का खाना बिल्कुल पसंद नहीं किया था.
उस दिन मैंने सीखा कि “हमेशा तैयार रहो!” आप अपने साथ कुछ हेल्दी स्नैक्स ज़रूर रखें. जैसे, कटा हुआ फल (सेब, केला), घर के बने बिस्कुट, पनीर के टुकड़े, या फिर एक छोटा सा सैंडविच.
छोटे बच्चों के लिए प्यूरी या बेबी फूड भी साथ ले जा सकते हैं. मैंने हमेशा अपने साथ एक छोटा सा जूस पैक या पानी की बोतल भी रखी है. कभी-कभी बच्चे नई चीज़ें खाने में नखरे करते हैं, तो ऐसे में ये ‘आपातकालीन स्नैक्स’ आपको शर्मिंदगी से बचाते हैं और बच्चे का पेट भी भर जाता है.
सबसे अच्छी बात यह है कि ये स्नैक्स आपके बच्चे को कुछ देर के लिए व्यस्त भी रखते हैं, और आप शांति से अपना खाना खत्म कर पाते हैं. विश्वास मानिए, थोड़ी सी तैयारी आपको बहुत सारी मुश्किलों से बचा सकती है!






